
शावर चल रहा था। रुक्मिणी दीवार से सटी खड़ी थी, पानी उसके बदन पर बह रहा था। वीरभद्र ने एक ताज़ा खीरा लिया (किचन से लाया हुआ, ठंडा और मोटा)। उसने रुक्मिणी की कमर पकड़ी, उसे थोड़ा झुकाया।
"रंडी... देख, आज तेरी चूत को कुछ नया ट्राई करते हैं।" उसने खीरा धीरे से उसके नीचे लगाया, सिर्फ़ सिरा अंदर डाला — ठंडक से रुक्मिणी सिहर उठी।

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