रात के 1 बज चुके थे।
हवेली की छत पर चाँदनी फैली हुई थी — पूरा आसमान साफ़, चाँद पूरा, हल्की ठंडी हवा। चारों तरफ़ कोई नहीं। सिर्फ़ चार लोग — वीरभद्र, अर्जुन, गौरांगी और रुक्मिणी।

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रात के 1 बज चुके थे।
हवेली की छत पर चाँदनी फैली हुई थी — पूरा आसमान साफ़, चाँद पूरा, हल्की ठंडी हवा। चारों तरफ़ कोई नहीं। सिर्फ़ चार लोग — वीरभद्र, अर्जुन, गौरांगी और रुक्मिणी।

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